Summary

Navratri ke pawan parv mein kuch cheezein hain jo nahi karni chahiye, jaise mithai khana , tamasic aahar, nashili padarth ka sevan, ladai-jhagad, aur samasyaon ka vichar. Is blog mein jaaniye inse kaise bachna hai.

Article Body

Navratri Mein kuch Cheezein Jo Nahi Karni Chahiye
Navratri Mein kuch Cheezein Jo Nahi Karni Chahiye

 

Navratri Mein kuch Cheezein Jo Nahi Karni Chahiye

 नवरात्रि में क्या नहीं करना चाहिए?

नवरात्रि हिंदू धर्म में एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है, जो माँ दुर्गा की पूजा के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से व्रत, उपवास, और आत्मा की शुद्धि का समय माना जाता है। नवरात्रि का उद्देश्य मानसिक, शारीरिक, और आत्मिक उन्नति करना है। इस समय में भक्तगण विशेष ध्यान, साधना, पूजा और उपासना करते हैं। हालांकि, नवरात्रि के दौरान कुछ चीजें हैं जो हमें नहीं करनी चाहिए, ताकि हमारा व्रत और उपासना शुद्ध और सफल हो। 

यहां हम नवरात्रि के दौरान करने योग्य और न करने योग्य कार्यों को विस्तार से चर्चा करेंगे।

 

 1. मांसाहार और नशे से बचें

नवरात्रि के दौरान उपवास रखने और साधना करने का मुख्य उद्देश्य शरीर को शुद्ध करना और आत्मा को पवित्र करना होता है। मांसाहार और नशे से शरीर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो कि पूजा और व्रत की पवित्रता को प्रभावित कर सकता है। 

 क्यों नहीं करना चाहिए?
- मांसाहार से शरीर में भारीपन और आलस्य आता है।
- नशे से मन और शरीर में अशांति रहती है, जो ध्यान और साधना में विघ्न डालती है।
- धार्मिक दृष्टि से मांसाहार और नशे का सेवन शरीर को अशुद्ध करता है।

 सुझाव:  नवरात्रि में केवल शाकाहारी आहार ग्रहण करें और शराब या अन्य मादक पदार्थों से दूर रहें।

 

  2. झगड़े और गुस्से से बचें

नवरात्रि के दौरान मन को शांत रखना अत्यंत आवश्यक है। गुस्सा, झगड़ा और विवाद किसी भी रूप में आत्मिक उन्नति में बाधा डाल सकते हैं। इस समय में हमें केवल सकारात्मक विचारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

 क्यों नहीं करना चाहिए?
- गुस्से से मन अशांत रहता है, जो पूजा की शांति में विघ्न डालता है।
- विवाद और झगड़े से मानसिक तनाव बढ़ता है, जो पूजा के उद्देश्य के विपरीत है।
- नकारात्मक भावनाएं रुकावट डालती हैं मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन में।

 सुझाव: अपने मन को शांत रखने की कोशिश करें और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें। सकारात्मक सोच को बढ़ावा दें।

 

 3. झूठ बोलने से बचें

झूठ बोलना किसी भी दिन और समय में गलत है, लेकिन नवरात्रि में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। इस पवित्र समय में हमें सत्य बोलने और अच्छे कर्म करने चाहिए। 

 क्यों नहीं करना चाहिए?
- झूठ बोलने से आत्मा पर नकारात्मक असर पड़ता है और पूजा की पवित्रता नष्ट होती है।
- सत्य बोलने से मन में शांति रहती है और आत्मिक उन्नति होती है।
- झूठ बोलने से रिश्तों में अविश्वास पैदा होता है, जो सामाजिक और मानसिक शांति को प्रभावित करता है।

 सुझाव:  सत्य बोलें और अपनी बातों में ईमानदारी रखें।

 

 4. बेहद भारी और चटपटे भोजन से बचें

नवरात्रि में उपवास करने का उद्देश्य शारीरिक रूप से हल्का और आत्मिक रूप से शुद्ध होना होता है। इसलिए, भारी और चटपटे भोजन से बचना चाहिए, जो शरीर को अधिक गर्मी और आलस्य देता है।

 क्यों नहीं करना चाहिए?
- भारी भोजन से शरीर में आलस्य आता है, जो पूजा और ध्यान में विघ्न डालता है।
- अधिक मसालेदार या तला-भुना भोजन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है, जिससे शरीर में अधिक तापमान पैदा होता है।
- नवरात्रि के दौरान उपवास करने से मानसिक और शारीरिक शक्ति मिलती है, लेकिन अत्यधिक खाने से यह उद्देश्य नहीं पूरा हो पाता।

 सुझाव:  साधारण, हल्का और पाचन में आसान भोजन ग्रहण करें। फ्रूट्स, सूप्स, और दूध से बने पदार्थ अच्छा विकल्प हो सकते हैं।

 

 5. व्यर्थ के कामों से बचें

नवरात्रि के समय में अनावश्यक और व्यर्थ के कामों में समय न गंवाना बहुत महत्वपूर्ण है। यह समय केवल आत्मिक उन्नति, ध्यान और साधना के लिए होता है। व्यर्थ की गतिविधियों से समय की बर्बादी होती है और ध्यान में विघ्न आता है।

 क्यों नहीं करना चाहिए?
- व्यर्थ के कामों में समय गंवाने से पूजा और साधना में संजीदगी नहीं रहती।
- नवरात्रि का उद्देश्य आत्मिक उन्नति है, जो केवल ध्यान और साधना के माध्यम से संभव है।
- समय की बर्बादी से हमारी व्रत और उपासना की शक्ति कमजोर होती है।

 सुझाव:  नवरात्रि के समय को धार्मिक कार्यों और आत्मिक उन्नति में निवेश करें। हर कार्य में पूजा और साधना का ध्यान रखें।

 

 6. नकारात्मक विचारों से बचें

नवरात्रि का समय मानसिक शांति और सकारात्मकता को बढ़ावा देने का होता है। नकारात्मक विचारों और मानसिक अशांति से हमें बचना चाहिए, ताकि पूजा और ध्यान में मन पूरी तरह से एकाग्र हो सके।

 क्यों नहीं करना चाहिए?
- नकारात्मक विचारों से मानसिक ऊर्जा नष्ट होती है, जो पूजा के उद्देश्य के खिलाफ है।
- यह मानसिक तनाव और अशांति पैदा करता है, जो हमारी साधना को प्रभावित करता है।
- नकारात्मक विचार आत्मिक शुद्धता और शांति की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं।

 सुझाव:  सकारात्मक विचारों पर ध्यान केंद्रित करें और नकारात्मकता से बचें। सकारात्मक सोच को बढ़ावा दें और मानसिक शांति को बनाए रखें।

 

 7.अत्यधिक सोने से बचें

नवरात्रि के दौरान अत्यधिक सोना भी अवांछनीय है। यह समय आत्मिक उन्नति का है, और अधिक सोने से शारीरिक और मानसिक शिथिलता आ सकती है। 

 क्यों नहीं करना चाहिए?
- अधिक सोने से शरीर में आलस्य और निष्क्रियता आती है।
- नवरात्रि के दौरान अधिक आराम करने से पूजा और साधना में मन नहीं लगता।
- शारीरिक स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।

सुझाव:  संतुलित मात्रा में सोएं और नवरात्रि के समय में जाग्रत रहें ताकि आप अपनी पूजा और साधना पर पूरी तरह से ध्यान दे सकें।

 

8. सिद्धांतों का पालन न करने से बचें

नवरात्रि के दौरान हमें कुछ खास सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, जैसे कि समय पर पूजा, नवरात्रि के व्रत का पालन, और शुद्धता के नियम। इन सिद्धांतों का पालन न करने से हमारी साधना अधूरी रह सकती है।

क्यों नहीं करना चाहिए?
- पूजा और साधना के नियमों का उल्लंघन करने से हम सही परिणाम नहीं प्राप्त कर सकते।
- नियमों के बिना साधना अधूरी रहती है और आत्मिक उन्नति में विघ्न आता है।
- धार्मिक परंपराओं का पालन करना हमारी श्रद्धा और विश्वास को बढ़ाता है।

सुझाव:  नवरात्रि के दौरान हर एक नियम का पालन करें और धार्मिक विधियों के अनुसार पूजा करें।

 

निष्कर्ष

नवरात्रि एक महत्वपूर्ण और पवित्र समय है, जो आत्मिक शुद्धि, ध्यान, और साधना के लिए आदर्श है। इस समय में हमें अपने आहार, विचार, और कार्यों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि हम अपने व्रत और पूजा को सही तरीके से निभा सकें। नवरात्रि के दौरान नकारात्मक गतिविधियों से बचने और सकारात्मक कार्यों को बढ़ावा देने से हम न केवल अपनी पूजा की पवित्रता बनाए रख सकते हैं, बल्कि आत्मिक और शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार कर सकते हैं। 

सभी भक्तों को नवरात्रि की शुभकामनाएं और यह समय उन्हें हर तरह से आशीर्वादित हो I

 

Comments

TOPICS MENTIONED IN THIS ARTICLE

About the Author(s)